Friday, 11 March 2016

मेरी माँ

तूने ही सिखाया ,ज़िन्दग़ी का हर पाठ,
तेरे ही आँचल के नीचे ज़न्नत हे मेरी माँ|
अपने अंशु छुपाकर ,मुझे खुशिया देकर ,
हर पल मुस्कराना ,आदत हे तेरी माँ|
मैं रहू या न रहू,
तेरे सपनो को पूरा करने मे अपनी ज़िन्दग़ी न्योछावार कर देना ,
खुशकिस्मती हे मेरी माँ ..

भूल ना जाना इस सहादत को…………..

ऐ मेरे वतन ,
निभा दिया वो हर फ़र्ज़ ,
जिसके लिए मैं आया था ,
छोड़ दिया उस माँ का दामन ,
जिसकी मैं दुनिया था ,
वो पिता जिसका एक ही सहारा था ,
मेरे जिगरा दी यारी ,अधूरी रह गयी मेरे बिन ,
मेरा सनम जिसका इंतज़ार कभी खत्म ना होने वाला था ,
आँखे बंद करके बहुत सुकून मिला ,
जब लिपटा था , तिरंगे की उस शान से ,
पर जब माँ सीने पर सर रख्कर रो रही थी ,
बहुत बेबस हो गया था ,
कैसे समजाता माँ , तेरा लाल तो अपने वतन पर शहीद हो गया ,
लेकिन सदैव ज़िंदा रहेगा वो ,अमर ज्योति बनकर …….

अब रुकना नहीं

एक असफलता जो झुकने को मजबूर कर दे,
साहस को शुण्ये तक मिला दे,
आत्मविश्वास को विचलित कर दे,
लेकिन अब रुकना नहीं,
सूरज की भाति चमकना है तो,
सहनी है ,वो आग की तपिश ,
लोहे सा मजबूत बन ,आँख की नमी छुपा ले,
योद्धा की भाति लड़ इस युद्ध मे,
मन मे बांध ये गांठ ,
जीत है आंखरी साँस ,
उस पार तेरी विजय निश्चित है ,
दिखा खुद को ,साबित कर अपना वजूद ,
ना परवाह कर दुसरो की ,
कल जब तू चमकेगा वो खुद ही पस्त हो जायेगे ,
तेरा हौसला तेरी उड़ान यही ह तेरे जीवन सा सार