Sunday, 16 July 2017

हर रोज़

हर रोज़ वही धुँआ ,
हर रोज़ वही नफरत ,
इंसानियत को खोज रही मेरे ज़मीन ,
अपनों को ही सही राह दिखाने को,
घर वापसी की बाट जोहे ,
प्रेम और सौहार्द से शांति लाने को ,
अपने लाल खो चुकी उस माँ की  हर पुकार पर ,
इस वादी ने अपनी बेबसी ही दिखाई है ,
हर रोज़ कितनी चीखे यहां दफ़न होती है ,
हर रोज़,
इंसानियत को खोज रही मेरे ज़मीन|   

Sunday, 30 October 2016

दीपक की लौ

कैसे मना लूँ ये दिवाली ,
मेरे घर लगा है ,दीपक का मेला ,
तो उस घर है ,आँशुओ का बसेरा ,

निभा दिया उसने अपना हर वादा  ,
अपनी आखरी साँस तक सरहद पर लड़ा ,
सांसे उखड़ रही थी ,आँखे बंद हुई जा रही थी ,
जूनून था बस दुश्मन से हर न मानना,

आया इस दिवाली वो अपने घर ,तिरंगे मे लिपटकर ,
बस वो चुप था ,चेहरे पर वही तेज़ था ,
माँ अब अपना ख़ुद से ख्याल रखना  ,
हर दिवाली पर ,पूरा घर हमेशा की तरह रोशन करना ,
माँ मे रहुगा हमेशा तेरे पास ,दीपक की इस लौ मे जलकर ...

Sunday, 25 September 2016

where did my happiness go?

where did my happiness go?
where can i find this so?
i have searched everywhere,
but it didn't see me anywhere.

yeah ,it seems on my shiny cheeks,
but alas its not true happiness,
i saw the mirror ,but it shown only my daldrums,
my hairs again and again came on my face,
but i have not intersted to see it.

let me know,where's my true  happiness exist,
o god,help me how can i find it.

Sunday, 3 April 2016

What a Life!!!

life is a hardest place,
we all have different journey,
differents paths along the way,
our aim is final destination,
to get it's not a easy,
sometimes we ups n downs ,
but believe in yourself ,
ready for next challenge,
when the  journey finally ends,
we'll claim a great reward .


Friday, 11 March 2016

मेरी माँ

तूने ही सिखाया ,ज़िन्दग़ी का हर पाठ,
तेरे ही आँचल के नीचे ज़न्नत हे मेरी माँ|
अपने अंशु छुपाकर ,मुझे खुशिया देकर ,
हर पल मुस्कराना ,आदत हे तेरी माँ|
मैं रहू या न रहू,
तेरे सपनो को पूरा करने मे अपनी ज़िन्दग़ी न्योछावार कर देना ,
खुशकिस्मती हे मेरी माँ ..

भूल ना जाना इस सहादत को…………..

ऐ मेरे वतन ,
निभा दिया वो हर फ़र्ज़ ,
जिसके लिए मैं आया था ,
छोड़ दिया उस माँ का दामन ,
जिसकी मैं दुनिया था ,
वो पिता जिसका एक ही सहारा था ,
मेरे जिगरा दी यारी ,अधूरी रह गयी मेरे बिन ,
मेरा सनम जिसका इंतज़ार कभी खत्म ना होने वाला था ,
आँखे बंद करके बहुत सुकून मिला ,
जब लिपटा था , तिरंगे की उस शान से ,
पर जब माँ सीने पर सर रख्कर रो रही थी ,
बहुत बेबस हो गया था ,
कैसे समजाता माँ , तेरा लाल तो अपने वतन पर शहीद हो गया ,
लेकिन सदैव ज़िंदा रहेगा वो ,अमर ज्योति बनकर …….

अब रुकना नहीं

एक असफलता जो झुकने को मजबूर कर दे,
साहस को शुण्ये तक मिला दे,
आत्मविश्वास को विचलित कर दे,
लेकिन अब रुकना नहीं,
सूरज की भाति चमकना है तो,
सहनी है ,वो आग की तपिश ,
लोहे सा मजबूत बन ,आँख की नमी छुपा ले,
योद्धा की भाति लड़ इस युद्ध मे,
मन मे बांध ये गांठ ,
जीत है आंखरी साँस ,
उस पार तेरी विजय निश्चित है ,
दिखा खुद को ,साबित कर अपना वजूद ,
ना परवाह कर दुसरो की ,
कल जब तू चमकेगा वो खुद ही पस्त हो जायेगे ,
तेरा हौसला तेरी उड़ान यही ह तेरे जीवन सा सार